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कृषि क़ानूनों में संशोधन को तैयार होकर केंद्र ने माना कि उसमें कमियां थीं: भारतीय किसान यूनियन.

December 22, 2020 11:45 AM

केंद्र सरकार के तीन विवादित कृषि कानूनों के विरोध में किसान बीते 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के प्रमुख जोगिंदर सिंह उगराहां का कहना है कि वे सरकार के तीनों कानूनों और इसमें हुए संशोधनों के भी खिलाफ हैं और वे कानूनों को रद्द करने की अपनी मांगों पर डटे हुए हैं.

जोगिंदर सिंह ने कहा, ‘हमने केंद्र सरकार के प्रस्तावों और संशोधनों को खारिज कर दिया है. पहले वे (सरकार) कह रहे थे कि कृषि कानून किसानों के कल्याण के लिए है, लेकिन बाद में वे संशोधन के लिए तैयार हुए. संशोधनों की प्रस्तावना कर उन्होंने सिद्ध कर दिया कि उनके कानूनों में कमियां हैं. किसी भी कानून में जिसमें इतनी कमियां हों, उसे रद्द किए जाने की जरूरत है.’

उन्होंने कहा, ‘हम स्पष्टता के साथ आए हैं कि ये संघर्ष लंबे समय तक चलेगा इसलिए हम इतने महीनों का राशन लेकर आए हैं. हमारे किसान बारी-बारी से प्रदर्शन स्थल पर आ रहे हैं. पंजाब में 50 से अधिक विरोध स्थलों के अलावा टिकरी बॉर्डर पर एक दिन में 50,000 से कम किसान स्थलों पर मौजूद नहीं होते. हम हरियाणा के किसानों के आभारी हैं, जो प्रदर्शनकारियों को गर्म-गर्म खाना और दूध मुहैया करा रहे हैं.’

उन्होंने जेल में बंद मानवाधिकारों की रिहाई के लिए प्रदर्शन आयोजित करने पर यूनियन के विवादों में आने के सवाल पर कहा, ‘लोकतांत्रिक अधिकारों की बात करना अपराध नहीं है और हम भविष्य में भी हमारे अधिकारों की मांग जारी रखेंगे. हमने अर्बन नक्सल, कांग्रेस के एजेंट, पाकिस्तान और उनके प्रधानमंत्री इमरान खान का पक्ष लेने वाले शब्द सुने. इन चीजों का कोई अर्थ नहीं है. मानवाधिकारों की बात करना अपराध नहीं है.’

केंद्र सरकार के किसानों के साथ एक और बैठक के लिए ताजा पत्र जारी करने पर प्रतिक्रिया जानने पर उन्होंने कहा कि इस पत्र में केंद्र सरकार ने वही पुराने संशोधनों की ही बात की है.

 
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